बिहार

बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या पहुंची 50 के पार

सूबे में बाघों के लिए संरक्षित एकमात्र वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में रॉयल बंगाल टाइगर की संख्या 50 पार कर गयी है। 2019-20 में हुई बाघों की गणना से इसकी जानकारी मिली है। व्याघ्र परियोजना के निदेशक हेमकांत राय ने कहा कि 2019-20 में कराई गई बाघों की गणना से संबंधित रिपोर्ट भारत सरकार के राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण व देहरादून के भारतीय वन्य जीव संस्थान को भेजी गइर है। आंकड़ों के अनुसार व्याघ्र परियोजना में बाघों की संख्या में वृद्धि हुई है।

वर्ष 2018 में हुई गणना के अनुसार 31 बाघ व नौ शावक थे। इस बार 12 शावकों का जन्म व्याघ्र परियोजना में हुआ है। वर्ष 2010 में व्याघ्र परियोजना में बाघों की कुल संख्या मात्र 10 थी। तराई इलाके वाले इस टाइगर रिजर्व की सीमा नेपाल के चितवन नेशनल पार्क से लगी है। बाघ दोनों सीमा की तरफ आते-जाते रहते हैं। 2008 में बाघों के कंजर्वेशन के लिए वीटीआर में इन्वेशमेंट चालू किया गया। जिसके अभूतपूर्व नतीजे जानवरों, इको सिस्टम, पौधों व वनस्पतियों में देखने को मिल रहे हैं।  

तराई के इस रिजर्व में है ढोल व गौर:
निदेशक हेमकांत राय ने बताया कि वीटीआर के 898.937 वर्ग किलोमीटर के इलाके में तेन्दुआ, लकबग्घा, भालू, चितल, सांभर के साथ-साथ ढोल (जंगली कुत्ता) व गौर (जंगली भैसा) पाए जाते हैं। तराई का यह एक मात्र टाइगर रिजर्व है जिसमें ढोल व गौर पाए जाते हैं। यहां के कुशल प्रबंधन के कारण इनकी संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

वन व जीवों की सुरक्षा के लिए है व्यापक प्रबंध:
वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना के वन संपदा व वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए व्याघ्र परियोजना के अधिकारी से लेकर कर्मी तक अपना कुशल योगदान दे रहे है, जिसके चलते शिकार के मामले घटे हंै। निदेशक श्री राय ने बताया कि शिकारियों पर कार्रवाई वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए 40 एंटी पोचिंग कैंप,17 वायरलेस टावर तथा 150 वन्यकर्मियों को तैनात किया गया है। उन्होंने कहा कि जंगली क्षेत्र के आसपास के गांवों के रहने वाले युवा भी अब जानवरों व पर्यावरण की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रहे है। लगभग छह सौ स्थानीय युवा वाल्मीकि टाइगर प्रोजेक्ट की सुरक्षा व प्रबंधन से जुड़े हुए हैं।

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