बिहार

बिहार चुनाव: इन 35 लाख वोटर ने बढ़ाई नेताओं की टेंशन, सबकी नजर

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 का बिगुल बज चुका है. सत्ताधारी दल के नेता हों या चाहे अन्य दल के, हर कोई अपने अपने हिसाब से सियासत के इस खेल में जीतने के लिए दम लगा रहा है. कहीं जातिगत आंकड़े तो कहीं विकास के दावों पर वोट मांगने का क्रम भी शुरू हो गया है, ऐसे में नेताओं को सबसे बड़ी टेंशन उन 35 लाख वोटर की है, जो साइलेंट कहे जाते हैं.

कौन हैं ये साइलेंट वोटर 
राज्य की बात की जाए, तो इन साइलेंट वोटर की संख्या करीब 35 लाख है. इसमें करीब 13 लाख ऐसे मतदाता हैं, जिनकी उम्र 80 वर्ष से अधिक है, वहीं, 6 लाख दिव्यांग हैं. इन वोटरों के बारे में कहा जाता है कि मतदान केन्द्र पर होने वाली भीड़ या अपनी लाचारी के चलते ये मतदान केन्द्र तक नहीं पहुंचते हैं, लेकिन इस बार चुनाव आयोग द्वारा इनके लिए अलग व्यवस्था की गई है. अब ऐसे मतदाताओं के घर फार्म 23 डी पहुंचाये जाएंगे. जिसके बाद ये ये मतदाता अपने घर से ही वोट कर सकेंगे. 

प्रवासी वोटर बड़ी चुनौती
वहीं साइलेंट वोटर की सूची में आने वाले प्रवासी वोटरों की संख्या भी कम नहीं है. लॉकडाउन के बाद राज्य में करीब 16 लाख के आसपास प्रवासी वोटर भी वापस आ गए हैं, जो बाहर रहने के कारण वोट नहीं कर पाते थे. इन वोटरों का रुख क्या रहेगा, इसका पता लगाने में राजनीतिक पंडित भी चकरा रहे हैं. चुनाव आयोग ने प्रवासियों के नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए अभियान चलाया, तो पता चला कि करीब 14 लाख प्रवासी ऐसे हैं, जिनका नाम मतदाता सूची में शामिल है, वहीं करीब दो लाख के आस पास ऐसे प्रवासी सामने आए, जिनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं मिला. इनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल कर लिया गया है.

बिगाड़ेंगे चुनावी गणित 
प्रत्याशी की हार जीत का खेल एक वोट से भी हो जाता है, ऐसे में राज्य में चिन्हित किए गए ये 35 लाख वोटर तो किसी भी सियासी दल की किस्मत बदल सकते हैं. राजनीतिक गुरु इन मतदाताओं का रुख पता करने के प्रयास में जुटे हुए हैं, तो वहीं नेताओं के लिए ये वोटर एक बड़ी टेंशन हैं.

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