Coronavirus

कोरोना से बचाने वाली दवा अब करने लगीं बीमार

प्रिकॉशन इज बेटर देन क्योर।’ कोरोना का डर या कोरोना काल में हमारी आदतों ने इस कहावत को उलट दिया है। कोरोना से बचाव के चक्कर में उससे अधिक खतरनाक बीमारियों पाले जा रहे हैं। अत्याधिक विटामिन सी, विटामिन डी, जिंक और अन्य दवाओं के सेवन से डायबिटीज और बीपी के साथ ही अवसाद और चिड़चिड़ापन जैसी बीमारियां घर करने लगी हैं।
 इन दवाओं की बिक्री का ग्राफ चौंकाने वाला है। जिला केमिस्ट एण्ड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष रंजन साहू ने बताया कि केवल विटामिन सी की खपत जिले में नौ सौ गुना बढ़ गई है। पहले केवल दो कंपनियां  विटामिन सी की दवा बनाती थीं जबकि अभी आठ कंपिनयों ने इसका उत्पादन शुरू किर दिया है। बेतहाशा मांग को देखते हुए मैन्यफैक्चरिंग ट्रेंड भी बदला है। श्री साहू के अनुसार कई कंपनियों ने अब विटामिन सी और जिंक को एक साथ ही कर दिया है। दवा कारोबारियों के अनुसार चार महीने में केवल मुजफ्फरपुर में लोगों ने विटामिन सी और डी के ढ़ाई करोड़ रुपये से अधिक की गोलियां खा गए।
विटामिन सी के साथ ही विटामिन डी,जिंक और बुखार की दवाओं का इस्तेमाल भी बेतहाशा तरीके से बढ़ा है। इस संबंध में वरिष्ठ फिजिशियन डा. निशन्द्र किंजल्क ने कहा कि विटामिन और जिंक के साथ ही लोगों ने अंधाधुंध तरीके से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन का सेवन भी किया है। इसके अत्याधिक और अनावश्यक सेवन से क्यूटी बढ़ता है जो हार्ट की समस्या पैदा करती है। ईसीजी में ऐसे खूब मामले देखे जा रहे हैं। डॉ. किंजल्क के अनुसार कोरोना के डर से लोग अनाप-शनाप तरीके से विटामिन की दवाएं खा रहे हैं। अगर शरीर स्वास्थ्य हो तो इसकी अतिरिक्त जरूरत नहीं पड़ती है। इससे हाइपर विटामिनोसिस सी और डी के खतरे बढ़ रहे हैं। इससे भी ह्रदय, रक्तचाप सहित कई बीमारियों के खतरे बढ़ जा रहे हैं। इसका असर अभी भी दिखने लगा है जबकि आने वाले दिनों में और खतरनाक असर दिखेगा।

अवसाद और चिड़चिड़ापन के मरीजों की संख्या बढ़ी
एक आंकड़ा और चौंकाने वाला निकल के सामने आ रहा है। सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों तक में अवसाद और चिड़चिड़ापन के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इस संबंध में एसकेएमसीएच के अधीक्षक डा.सुनील कुमार शाही ने बताया कि निश्चित संख्या नहीं निकाली जा सकी है मगर ओपीडी के डॉक्टरों के अनुसार तीस से चालीस फीसदी मरीजों में ये लक्षण दिख रहे हैं। इनमें दवाओं के प्रयोग का असर भी हो सकता है मगर सबसे अधिक कोरोना को बना डर है। न्यूरो विशेषज्ञ डा.एपी शाही ने बताया कि इन दवाओं में एस्ट्रॉयड की मात्रा भी होती है। अधिक इस्तेमाल से न्यूरो की समस्या आ सकती है। डिप्रेशन भी उसी कड़ी का हिस्सा है।
डॉक्टरों के साथ ही केमिस्ट ने भी माना है कि अत्याधिक मांग के कारण अब बाजार में जिंक और विटामिन की नकली दवाएं भी आ चुकी हैं। डॉक्टरों के अनुसार बिना चिकित्सीय सलाह के ऐसी दवाओं का प्रयोग न करें।

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