बिहार

बिहार में डेटलाइन खत्म होने की कगार पर लेकिन अबतक 146 अस्पतालों में से मात्र 15 में ही लगी X-Ray मशीन

बिहार के 146 जिला एवं अनुमंडलीय अस्पतालों में एक्सरे मशीन लगाने की योजना पिछड़ गयी है। अबतक मात्र 15 अस्पतालों में ही एक्सरे मशीन लगाई जा सकी है। ये मशीनें पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत लगायी जानी हैं। यह योजना मार्च में शुरू हुई थी। 31 दिसंबर 2020 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य था।

स्वास्थ्य विभाग ने इन मशीनों को तय समय सीमा के तहत लगाने में हो रही देरी को लेकर संबंधित एजेंसियों को फटकार लगायी है। विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे 31 दिसंबर तक मशीनों के लगाए जाने को लेकर आ रही सभी बाधाओं को दूर करें। बुधवार को प्रधान सचिव ने संबंधित एजेंसियों के प्रतिनिधियों को तलब किया और उन्हें एक्सरे मशीन लगाने के कार्य ताजा स्थिति की जानकारी ली।

राज्य के 146 अस्पतालों में पीपीपी के तहत एक्सरे मशीन लगाने की जिम्मेदारी दो एजेंसियों को दी गयी है। इनमें ब्रिज हेल्थ सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को 76 और अनिका फाउंडेशन को 70 अस्पतालों में एक्सरे मशीन लगानी है।


एनओसी नहीं मिलने से हुई देर
सूत्रों ने बताया कि कोरोना व अनापत्ति प्रमाण पत्र के समय पर उपलब्ध नहीं होने के कारण एक्सरे मशीनों को लगाने में देरी हुई है। सूत्रों के अनुसार, कोरोना के कारण लंबी लॉकडाउन अवधि के बीच एक्सरे मशीनों की आपूर्ति की प्रक्रिया में देरी हुई। वहीं, जिन अस्पतालों में इसे लगाना है, वहां से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त कर मशीनों की खरीद के लिए केंद्रीय एजेंसी से स्वीकृति प्राप्त करने और पुन: खरीद के बाद उसे चालू करने लेकर केंद्रीय एजेंसी से स्वीकृति प्राप्त करने की प्रक्रिया में देरी हुई है। स्वास्थ्य विभाग ने जल्द अनापत्ति प्रमाण पत्र देने का भी निर्देश दिया।

मरीजों की मुफ्त होगी एक्सरे
राज्य के अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को मुफ्त एक्सरे सुविधा उपलब्ध होगी। एक एक्सरे मशीन की कीमत छह लाख रुपये से अधिक है। वहीं, एक्सरे मशीन लगाने के लिए चिह्नित अस्पतालों में प्रतिदिन औसतन पांच सौ मरीज इलाज के लिए आते हैं। एक्सरे मशीन के अभाव के कारण उन्हें बाहर से एक्सरे कराने को मजबूर होना पड़ता है।

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