बिज़नेस

कोरोना का कहर : एक साल के उच्चतम स्तर के करीब बेरोजगारी, गांवों में बढ़ा नौकरियों का संकट

कोरोना महामारी की दूसरी लहर को काबू करने के लिए लगाए गए लॉकडाउन ने एक बार फिर से रोजगार का संकट खड़ा कर दिया है। लॉकडाउन के कारण उद्योग-धंधे बंद होने से देश में बेरोजगारी एक बार फिर से एक साल के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गई है।

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी ( सीएमआईई) की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, 16 मई को खत्म हुए सप्ताह के दौरान ग्रामीण बेरोजगारी बीते एक हफ्ते में दोगुनी बढ़कर 14.34 फीसदी हो गई। इससे पिछले हफ्ते में ग्रामीण बेरोजगारी दर 7.29 फीसदी थी। इस दौरान शहरी बेरोजगारी भी 11.72 फीसदी से बढ़कर 14.71 फीसदी पर पहुंच गई। वहीं, पिछले साल जून में ग्रामीण बेरोजगारी रिकॉर्ड 17.51 फीसदी पर पहुंच गई थी। वहीं, गांवों में बेरोजगारी बढ़ने से 17 मई तक मनरेगा के तहत 4.88 करोड़ लोगों ने काम मांगा था। इनमें से 4.29 करोड़ लोगों का काम मिला लेकिन इनमें से 3.14 करोड़ लोग ही काम करने आए। इससे पता चलता है कि श्रमिक कोरोना संक्रमण के डर की वजह से इसके तहत काम करने नहीं आ रहे हैं। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती बेरोजगारी से पार पाना आने वाले समय में भी मुश्किल होने वाला है क्योंकि दूसरी लहर से कंपनियों की वित्तीय स्थिति बहुत ही प्रभावित हुई है। वह अपने मौजूदा कर्मियों से काम करेंगे। नई नियुक्तियां बहुत ही कम संख्या में होने की उम्मीद है।

आधे से अधिक खाताधारकों ने पीएफ से पैसा निकाला

कोरोना काल में नौकरी छूंटने से लाखों लोगों को घर चलाना मुश्किल हो रहा है। जरूरी खर्चों की भरवाई के लिए पीएफ निकासी का सहारा ले रहे हैं। इसकी वजह से एक अप्रैल 2020 से अब तक 3.5 करोड़ लोगों ने अपने पीएफ खाते से पैसे निकाले हैं। 3.5 करोड़ लोगों द्वारा निकासी का यह आंकड़ा कुल पीएफ खाताधारकों का आधे से भी अधिक है। वर्तमान में ईपीएफओ के लगभग छह करोड़ खाताधारक हैं। इतना ही नहीं, एक अप्रैल 2020 से 12 मई 2021 तक 72 लाख कर्मचारियों ने कुल 18,500 करोड़ रुपये का नॉन रिफंडेबल कोविड-19 फंड (कोविड एडवांस) का लाभ उठाया है। रिपोर्ट के अनुसार, 3.5 करोड़ खाताधारकों ने कुल मिलाकर 1.25 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं।

ईएमआई चूक करने के मामले 50 फीसदी बढ़े

कोरोना की दूसरी लहर के बाद मई महीने में ईएमआई नहीं भरने वालों की संख्या में करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यह जानकारी एनबीएफसी की ओर से दी गई है। एनबीएफसी कंपनियों ने कहा कि कोरोना और लॉकडाउन के कारण वह कलेक्शन एजेंट घर नहीं भेज पा रहे हैं। इससे ईएमआई चूक के मामले में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। कंपनियों का कहना है कि स्थिति पिछले साल से काफी गंभीर है। कोरोना की लहर के कारण कई कलेक्शन एजेंट की मौत हो गई है। एनबीएफसी का कहना है कि बीते एक महीने में एनपीए खातों की संख्या 25 फीसदी बढ़ी है। इसके साथ ही चेक बाउंस के मामले में भी पांच फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है।

Share This Post