समस्तीपुर

समस्तीपुर शहर में चारों तरफ कहीं कूड़े का अंबार तो कहीं जलजमाव, नगर परिषद लाचार

समस्तीपुर। शहर में चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा है। कहीं कूड़ा कचरा तो कहीं कीचड़। कहीं जलजमाव तो कहीं टूटी सड़कें। गलियां हों या मुख्य मार्ग कोना-कोना कूड़ा कचरा व गंदगी से बजबजा रहा है। यूं तो नगर परिषद द्वारा रोजाना कचरे का उठाव किया जाता है। लेकिन यह नाकाफी दिख रहा। बीते कुछ दिनों से साफ-सफाई की पूरी व्यवस्था बेपटरी हो गई है। नालों का दूषित पानी ओवरफ्लो होकर सड़क व कैंपस में फैल रहा है। सड़क किनारे कचरे का अंबार जमा है। नालों के दूषित पानी में कचरे उपला रहे हैं। कई जगह टॉयलेट जमा है। इससे आने-जाने में लोगों की फजीहत हो रही है। दुर्गंध के कारण लोग नाक पर रुमाल रखकर रास्ता पार करते हैं। जलजमाव व गंदगी से लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

शहर में इन जगहों पर कूड़े का अंबार

शहर के अंदर वैसे तो जिधर देखेंगे कूड़े ही नजर आएंगे, लेकिन कुछ जगहों पर स्थिति काफी खराब है। शहर के मोहनपुर रोड, बीएड कॉलेज, काशीपुर, सोनवर्षा चौक, गणेश चौक आदि जगहों पर कूड़े का ढेर है। कूड़े के ढेर से सड़ांध परेशान करती है। सड़क पर चलने वाले तथा आसपास के दुकानदार बदबू से त्रस्त हैं।

हर रोज 20 टन होता है कचरे का उठाव

नगर परिषद के सफाई कर्मियों द्वारा शहर में प्रत्येक वार्डों से प्रतिदिन लगभग 20 टन कचरे का उठाव किया जाता है। इसे फेंकने के लिए केंद्रीय विद्यालय के पीछे और कृष्णापुरी में डंपिग ग्राउंड बने हैं। कचरा निस्तारण के लिए उपकरण भी लगाए गए हैं। नगर परिषद द्वारा गंदगी से निपटने के लिए प्रतिमाह लगभग पांच लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। साफ.सफाई के लिए नगर परिषद अंतर्गत 29 वार्डों में जमादार व सफाई कर्मी भी नियुक्त किए गए हैं। प्रत्येक घरों में सूखा और गीला कचरा निकालने के लिए अलग अलग डस्टबिन भी वितरण किए गए। लगभग 300 दैनिक सफाई कर्मी डोर टू डोर कचरे का उठाव करते हैं।

लाखों रुपये की लागत से आई डस्टबिन बेकार पड़ी

नगर परिषद द्वारा चौक.चौराहों पर कचरा जमा करने के लिए लाखों रुपये की लागत से चौक.चौराहे तथा प्रत्येक वार्ड में लोहे की डस्टबिन लगाई गई हैं। लेकिनए मेंटेनेंस के अभाव में अधिकतर डस्टबिन जंग लगकर बेकार हो गई हैं। इसके कारण लोग सड़क किनारे खुले में कचरा डाल देते हैं।

आम आदमी को नहीं रहा ध्यान

घरों के कूड़ा फेंकने में आम लोग भी सावधानी नहीं बरत रहे हैं। उनके द्वारा घर की सफाई कर पॉलीथिन में कचरे भरकर सीधे सड़क पर फेंक दिया जाता है। ऊपरी मंजिल पर रहने वाले लोग तो नीचे आने की जहमत भी नहीं उठाते सीधे खाली सड़क देख ऊपर से कचरा पॉलीथिन में बांधकर फेंक देते हैं। 

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