बिहार

चपरासी की नौकरी के लिए B.Tech पास युवकों की जद्दोजहद, बिहार विधान परिषद के बाहर लगी कतार

बेरोजगारों को रोजगार देने के नीतीश कुमार और बीजेपी नेताओं के वायदों की हकीकत देखनी हो तो बिहार विधान परिषद के बाहर पहुंच जाइये. विधान परिषद में चपरासी, सफाईकर्मी, माली और दरबान जैसे पदों के लिए बहाली चल रही है. B.Tech से लेकर पीजी और ग्रेजुएट युवक धक्के खाते दिख जायेंगे. विधान परिषद ने फोर्थ ग्रेड यानि चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों की बहाली के लिए इंटरव्यू शुरू किया है. इस इंटरव्यू को देने के लिए जो लोग आ रहे हैं, वे बिहार की सही तस्वीर बयान कर देंगे.

विधान परिषद में नौकरी के लिए इंटरव्यू
बिहार विधान परिषद ने फोर्थ ग्रेड के 134 पदों पर बहाली के लिए वैकेंसी निकाली थी. परिषद में 96 चपरासी यानि ऑफिस अटेंडेंट और 38 सफाईकर्मी, माली, दरबान के बहाली प्रक्रिया शुरू की गयी है. सिर्फ 136 पदों की जब परिषद ने आवेदन मांगा तो लाखों की तादाद में एप्लीकेशन आ गये. सिर्फ इंटरव्यू के आधार पर ये बहाली होनी है. लिहाजा दो महीने तक इंटरव्यू की प्रक्रिया चलती रहेगी. 8 दिसंबर से इंटरव्यू शुरू हुआ है जो 29 जनवरी तक चलता रहेगा. हर दिन चार पालियों में तकरीबन 600 उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया जा रहा है.

चपरासी बनने आये बीटेक पास बेरोजगार
विधान परिषद के बाहर इंटरव्यू के लिए इंतजार कर रहे नवादा के सचिन कुमार से हमारी मुलाकात हुई. सचिन ने चपरासी यानि ऑफिस अटेंडेंट पद के लिए आवेदन दिया है. इस पद के लिए विधान परिषद ने शैक्षणिक योग्यता 10वीं पास रखी है. हमने सचिन से पूछा कि अच्छी योग्यता होने के बाद छोटे पद के लिए आवेदन क्यों दिया. जवाब मिला..तो क्या करें, भूखे मर जायें. बीटेक की डिग्री रख कर कोई नौकरी नहीं मिल रही. चपरासी की भी सरकारी नौकरी मिल जाये तो परिवार तो चल जायेगा.

सचिन तो एक बानगी भर हैं. विधान परिषद के बाहर भीड़ में मोतिहारी से आये प्रदीप कुमार, गोपालगंज से आये जावेद अंसारी और मुजफ्फरपुर से आये अविनाश कुमार मिले. सब कम से कम ग्रेजुएट. सरकार ने पिछले साल टीचर की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला था तो उसमें इन तीनों ने भी एप्लाई किया था. लेकिन 2019 में निकाली गयी शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया आज तक पूरी नहीं हो पायी. निराश होकर चपरासी के लिए ही आवेदन दिया है. कोई तो नौकरी मिले. कहीं से तो जीवन बसर करने का रास्ता निकले. चाहे इसके लिए विधान परिषद में साहबों को पानी पिलाना और ऑफिस में साफ-सफाई ही क्यों न करनी पड़े.

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